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सिद्ध होना प्रसिद्ध होने से बड़ी बात, भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती: पं. कमलकिशोर नागर

ब्यूरो रिपोर्ट: विजय द्विवेदी, धार (मध्य प्रदेश)

पिंजराया (बदनावर)।ग्राम पिंजराया में गोहिल परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन मालव माटी के सुप्रसिद्ध कथावाचक पं. कमलकिशोर नागर ने भक्ति और संस्कारों पर प्रेरक विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की धरती पर कई स्थान प्रसिद्ध हैं, लेकिन सिद्ध होना प्रसिद्ध होने से बड़ी बात है। जिस प्रकार 16 लाख विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम आने पर सभी कलेक्टर नहीं बनते, पर उनकी शिक्षा व्यर्थ नहीं जाती, वैसे ही कथा में बैठने वालों की भक्ति कभी निष्फल नहीं होती।

संस्कारों के फल के लिए सत्संग का ‘मोड़’ जरूरी

पं. नागर ने आम के पेड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार आम पर पहले ‘मोड़’ (बौर) आता है और फिर फल, वैसे ही सत्संग से बहू-बेटियों के जीवन में विचारों का मोड़ आता है, जिससे परिवार में संस्कृति और संस्कार के फल लगते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि यदि एक गर्भवती महिला कथा सुन ले, तो आने वाली पीढ़ी के 80 साल सुधरने की गारंटी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से पर्यावरण संरक्षण हेतु आम के पौधे लगाने का संकल्प भी दिलाया।

नाम में राम और कार्यों में सेवा ही असली अमृत

कथा के दौरान उन्होंने रावण और लक्ष्मण के संवाद के माध्यम से 10 प्रकार के ‘अमृत’ का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि नामों में ‘राम’, कार्यों में ‘सेवा’, फलों में ‘आम’, नक्षत्रों में ‘चंद्रमा’ और नारी में ‘शीलता’ का गुण अमृत समान है। उन्होंने शुद्धता पर जोर देते हुए कहा कि जिस प्रकार गाय का दूध अमृत है, लेकिन सवा माह तक भगवान को नहीं चढ़ता, वैसे ही अशुद्ध कमाई धर्म के कार्यों में नहीं लगती।

दुर्गुणों के वायरस से दूर रहने की चेतावनी

कथा के प्रारंभ में बाल संत गोविंद हाटकेश नागर ने अतिरिक्त व्यास पीठ से संबोधित करते हुए कहा कि भागवत कथा हमें दुर्गुणों से वैसे ही दूर रहने की चेतावनी देती है, जैसे कोरोना काल में वायरस से बचने के लिए दूरी जरूरी थी। उन्होंने कहा कि धर्म के ऊपर ही अर्थ (धन) टिका है। यदि हमारा धन धर्म के कार्यों में लगता है, तभी वह सुरक्षित और सार्थक है।

पोथी पूजन एवं आयोजन

कथा के मुख्य यजमान रतन सिंह गोहिल (सुपुत्र मेहरबान सिंह) एवं इंदर सिंह गोहिल ने सपत्नीक व्यास पीठ का पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन और जानकारी गोवर्धन सिंह डोडिया खिलेड़ी द्वारा दी गई।


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