ब्यूरो रिपोर्ट: विजय द्विवेदी, धार (मध्य प्रदेश)
बदनावर | 17 अप्रैल, 2026
गौमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने और गौ-संरक्षण के लिए कड़े कानून बनाने की मांग को लेकर देशव्यापी ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ बदनावर क्षेत्र में अब जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को इस अभियान से जोड़ रहे हैं। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग का इस मुहिम को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
हस्ताक्षर अभियान और पत्रक वितरण
अभियान को गति देने के लिए कार्यकर्ताओं द्वारा सघन जनसंपर्क किया जा रहा है।
- लक्ष्य: कार्यकर्ताओं ने अकेले बदनावर क्षेत्र में हजारों हस्ताक्षरों का लक्ष्य रखा है।
- जनसंपर्क: गांव-गांव में टोलियां बनाकर बैठकें की जा रही हैं। अब तक एक दर्जन से अधिक गांवों में सफल सभाएं आयोजित की जा चुकी हैं।
- प्रसार: घर-घर जाकर पत्रक बांटे जा रहे हैं ताकि हर नागरिक को गौ-सेवा और सम्मान के इस उद्देश्य से अवगत कराया जा सके।
तहसीलदार को सौंपा आवेदन, 27 अप्रैल को बड़ा प्रदर्शन
अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को बदनावर तहसीलदार सुरेश नागर से मुलाकात कर उन्हें आगामी 27 अप्रैल को दिए जाने वाले ज्ञापन के विषय में अवगत कराया। कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के लिए औपचारिक अनुमति का आवेदन भी सौंपा। अनुमान लगाया जा रहा है कि 27 अप्रैल को हजारों की संख्या में गौ-भक्त तहसील मुख्यालय पर जुटेंगे।
अभियान के मुख्य उद्देश्य और कार्ययोजना
यह अभियान पूरी तरह गैर-राजनीतिक और अहिंसक है। इसका मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है:
- राष्ट्रमाता का दर्जा: गौमाता को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रमाता घोषित कराना।
- सशक्त कानून: गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गौ-वंश संरक्षण के लिए कड़ा कानून बनाना।
- नीतिगत सुधार: गौ-आधारित कृषि और पंचगव्य उत्पादों को बढ़ावा देना।
दो चरणों में रणनीति: योजना के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 को देश के सभी तहसील, ब्लॉक और जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया के आधार पर 27 जुलाई 2026 को पुनः ज्ञापन और आवश्यकता पड़ने पर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
साधु-संतों और समाज का मिला साथ
अभियान में गौपालक, गौसेवक, साधु-संत, संन्यासी और गौ-प्रेमी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने अपील की है कि यह किसी संगठन का नहीं, बल्कि जन-जन का अभियान है। संकीर्तन, रैली और शांतिपूर्ण ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी।
