ब्यूरो चीफ: विनीत सिंह, सीतापुर
लखीमपुर खीरी। जनपद के ग्राम ईसापुर में इन दिनों आस्था और अध्यात्म का एक विहंगम दृश्य देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर पारा लगातार चढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर ‘हिंदू हृदय सम्राट’ श्री श्री 1008 श्री शिवदाश जी महाराज लोक कल्याण की भावना से नदी के किनारे 90 दिनों की अत्यंत कठिन तपस्या में लीन हैं।
तपती धूप और भीषण गर्मी के बीच मौन साधना
महाराज श्री ने संसार में सुख-शांति, ज्ञान के प्रसार और भक्ति की अलख जगाने के उद्देश्य से यह साधना शुरू की है। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप की परवाह किए बिना, महाराज जी नदी के एकांत तट पर पूर्ण मौन धारण कर ईश्वर की भक्ति में रमे हुए हैं। उनकी यह साधना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
धर्म की पुनर्स्थापना है मुख्य उद्देश्य
स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि महाराज जी का यह कठिन तप न केवल व्यक्तिगत साधना है, बल्कि यह धर्म की पुनर्स्थापना और लोक कल्याण के लिए किया जा रहा अनुष्ठान है। ग्रामीण इसे क्षेत्र की सुख-समृद्धि से जोड़कर देख रहे हैं।
दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु
जैसे-जैसे महाराज श्री की तपस्या की सूचना आसपास के क्षेत्रों में फैल रही है, नदी तट पर श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है। भक्तगण दूर-दूर से महाराज जी के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने ईसापुर पहुंच रहे हैं। 90 दिनों तक चलने वाली इस साधना के दौरान महाराज जी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटकर अंतर्मन की शांति और विश्व शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
