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रोहिड़ा में भक्ति का सैलाब: वर्षीतप के पारणे और भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव संपन्न

ब्यूरो चीफ: इमरान खान

रोहिड़ा/सिरोही। निकटवर्ती रोहिड़ा कस्बे में आयोजित श्री महावीर स्वामी जिनालय अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव के छठे दिन सोमवार को श्रद्धा और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। पूज्य आचार्य भगवंत रविरत्नसूरीश्वरजी म.सा., जयेशरत्नसूरीश्वरजी म.सा. एवं पन्यांस वैराग्यरत्नविजय जी म.सा. की पावन निश्रा में महोत्सव के तहत कई धार्मिक विधान संपन्न हुए।

साध्वीजी ने 400 दिन की कठिन तपस्या का किया पारणा

महोत्सव के विशेष अवसर पर साध्वी मोक्षम् रेखाश्रीजी म.सा. एवं रोहिड़ा निवासी आठ अन्य भाई-बहनों के वर्षीतप के पारणे (उपवास खोलना) हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुए। उल्लेखनीय है कि साध्वीजी ने अल्पायु में ही 400 दिनों तक एकांतरा उपवास की कठिन साधना कर यह वर्षीतप पूर्ण किया। भगवान आदिनाथ जिनालय में इक्षु रस (गन्ने के रस) से अभिषेक के पश्चात तपस्वियों को पारणा कराया गया। इस हेतु लाभार्थी श्रीमती मीठी बेन ताराचंदजी के गृह आंगन में गुरु भगवंतों के पावन पगले किए गए।

क्षत्रियकुंड नगरी बना पंडाल, गूंजी ‘पुत्र रत्न’ की बधाई

दोपहर के सत्र में महोत्सव स्थल ‘क्षत्रियकुंड नगरी’ के रूप में तब्दील हो गया। यहाँ भगवान महावीर के जन्म कल्याणक का प्रसंग जीवंत हो उठा। माता त्रिशला और राजा सिद्धार्थ के आंगन में पुत्र जन्म की बधाई लेकर जब प्रियवंदा दासी संगीत की धुनों पर नाचती हुई राजदरबार में पहुंची, तो पूरा पंडाल झूम उठा। इसके पश्चात भगवान का नामकरण संस्कार और पाठशाला गमन के दृश्य मंचित किए गए।

सियाकरा और अनादरा में भी हुई तपस्या की पूर्णाहुति

वर्षीतप पारणे की गूंज जिले के अन्य क्षेत्रों में भी रही:

  • सियाकरा: प्राचीन तीर्थ सियाकरा में आचार्य भगवंत रत्नाकरसूरीश्वरजी की निश्रा में वर्षीतप के पारणे हुए। यहाँ पारणा करवाने का लाभ सिरोही निवासी ज्ञानचंदजी पुनमचंदजी गांधी (किशोर गांधी परिवार) ने लिया।
  • अनादरा: यहाँ भी तपस्वियों ने श्रद्धापूर्वक अपने वर्षीतप का समापन किया।

धार्मिक अनुष्ठानों की रही धूम

इससे पूर्व सुबह जिनालय में देवी पूजन और 18 अभिषेक के विधान संपन्न हुए। लाभार्थी रोहिड़ा जैन संघ के अध्यक्ष श्री शांतिलालजी केसरीमलजी जैन के निवास पर भी गुरु महाराज के पावन पगले हुए। रात्रि में भव्य भक्ति भावना का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु देर रात तक भक्ति गीतों पर झूमते रहे।

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